फ़िल्मी शेर पर गीत

यहाँ हमने जो अशआर जमा

किए है उन का इस्तेमाल फ़िल्मों में हुआ है और इसी वजह से इन में से बेश्तर अशआर ज़बान-ए-ज़द ख़ास-ओ-आम है और हमारी ज़िंदगी के रोज़-मर्रा के मुआमलात को घेरते हैं। उम्मीद है आप को ये इन्तिख़ाब पसंद आएगा।

कारवाँ गुज़र गया

गोपालदास नीरज

मुझे दर्द-ए-दिल का पता न था

मजरूह सुल्तानपुरी

गीत

मजरूह सुल्तानपुरी

हम आज कहीं दिल खो बैठे

मजरूह सुल्तानपुरी

मैं खो गया यहीं कहीं

मजरूह सुल्तानपुरी
बोलिए