ग़ुलामी

मेरा अक़ीदा है कि जो क़ौम अपने आप पर जी खोल कर हँस सकती है वो कभी ग़ुलाम नहीं हो सकती।

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी

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