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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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ग़ुलामी पर नअत

अफ़्साना-ए-कलीम है दौर-ए-कुहन की बात

जमील अहमद क़ादरी सालिमी गुन्नौरी

सलातीन-ए-जहाँ देने सलामी बार बार आए

जमील अहमद क़ादरी सालिमी गुन्नौरी

हुआ ख़ुद सर-ब-सज्दा घर ख़ुदा का

जमील अहमद क़ादरी सालिमी गुन्नौरी

तिरा ज़िक्र है अज़ल से तिरी शान ला-बुदी है

जमील अहमद क़ादरी सालिमी गुन्नौरी
बोलिए