Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

आदिल फ़रहत

ग़ज़ल 8

अशआर 2

कितने ही साँप यहाँ के पड़े रहते हैं

इस लिए आस्तीं दिल से भी बड़ी रक्खी है

वो नज़र आई मुझे रेल की खिड़की से मगर

तय-शुदा वक़्त में ज़ंजीर नहीं खींच सका

 

अन्य शायरों को पढ़िए

 

Recitation

बोलिए