अब्दुल वक़ार के शेर
पहले आँसू से दिल हल्का होता था
अब आँखों से ख़ून बहाना पड़ता है
पुख़्ता कर ले ऐ ज़ाहिद अपना ईमाँ
मस्जिद से पहले मय-ख़ाना पड़ता है
बातों की क़ीमत जब घटने लगती है
तब अश्कों को काम में लाना पड़ता है
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