Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Ain Tabish's Photo'

ऐन ताबिश

1958 | गया, भारत

प्रसिद्ध समकालीन शायर, अपनी नज़्मों के लिए मशहूर

प्रसिद्ध समकालीन शायर, अपनी नज़्मों के लिए मशहूर

ऐन ताबिश

ग़ज़ल 30

नज़्म 20

अशआर 14

आज भी उस के मिरे बीच है दुनिया हाइल

आज भी उस के मिरे बीच की मुश्किल है वही

इक ज़रा चैन भी लेते नहीं 'ताबिश'-साहब

मुल्क-ए-ग़म से नए फ़रमान निकल आते हैं

एक ख़ुश्बू थी जो मल्बूस पे ताबिंदा थी

एक मौसम था मिरे सर पे जो तूफ़ानी था

जहाँ अपने अज़ीज़ों की दीद होती है

ज़मीन-ए-हिज्र पे भी कोई ईद होती है

  • शेयर कीजिए

हर ऐसे-वैसे से क़ुफ़्ल-ए-क़फ़स नहीं खुलता

इस इम्तिहाँ के लिए कुछ हक़ीर होते हैं

रेखाचित्र 1

 

पुस्तकें 9

 

वीडियो 13

This video is playing from YouTube

ऑडियो 11

आवारा भटकता रहा पैग़ाम किसी का

ख़ाकसारी थी कि बिन देखे ही हम ख़ाक हुए

ग़ुबार-ए-जहाँ में छुपे बा-कमालों की सफ़ देखता हूँ

Recitation

अन्य शायरों को पढ़िए

 

Recitation

बोलिए