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अल्लामा इक़बाल

1877 - 1938 | लाहौर, पाकिस्तान

महान उर्दू शायर, पाकिस्तान के राष्ट्र-कवि जिन्होंने 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' और 'लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी' जैसे गीतों की रचना की

महान उर्दू शायर, पाकिस्तान के राष्ट्र-कवि जिन्होंने 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' और 'लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी' जैसे गीतों की रचना की

अल्लामा इक़बाल पर स्कॉलर लेख

इक़बाल की शायरी का सौतियाती (ध्वन्यात्मक) तिलिस्म: सफ़ीरी और मुसलसल आवाज़ों का कमाल

यह लेख अल्लामा इक़बाल की शायरी में ध्वन्यात्मक लय, ख़ास तौर पर सफ़ीरी (Sibilants) और मुसलसल (Continuants) आवाज़ों के बहुत ज़्यादा इस्तेमाल और उनसे पैदा होने वाले माहौल का विश्लेषण करता है।

इक़बाल की शायरी का मिज़ाज और हकार (Aspirated) व माकूसी (Retroflex) आवाज़ों से परहेज़

इस मज़मून (लेख) में इस बात का जायज़ा लिया गया है कि अल्लामा इक़बाल ने अपनी शायरी में उर्दू की भारी-भरकम हकार (Aspirated) और माकूसी (Retroflex) आवाज़ों का इस्तेमाल कितना कम किया है और इससे उनके शायरी के अंदाज़ पर क्या असर पड़ा है।

इक़बाल की शायरी में क्लासिकी शेरियात और शब्दों की मुनासिबत का जलवा

इक़बाल को आमतौर पर 'पैग़ाम' का शायर समझा जाता है, लेकिन उनका कलाम क्लासिकी शेरियात, रिआयत, मुनासिबत और ईहाम के बेहतरीन फ़न्नी नमूनों से मालामाल है।

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