अर्शी भोपाली
ग़ज़ल 15
अशआर 6
निगाह-ए-नाज़ की मासूमियत अरे तौबा
जो हम फ़रेब न खाते तो और क्या करते
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
हमें तो अपनी तबाही की दाद भी न मिली
तिरी नवाज़िश-ए-बेजा का क्या गिला करते
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
बहुत अज़ीज़ न क्यूँ हो कि दर्द है तेरा
ये दर्द बढ़ के रहा इज़्तिराब हो के रहा
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
हम तो आवारा-ए-सहरा हैं हमें क्या मतलब
उन की महफ़िल में जुनूँ की कोई तौक़ीर सही
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
अन्य शायरों को पढ़िए
-
गुलनार आफ़रीन
-
वहशत रज़ा अली कलकत्वी
-
अर्श सिद्दीक़ी
-
जयकृष्ण चौधरी हबीब
-
मुनव्वर लखनवी
-
नूह नारवी
-
मिर्ज़ा अल्ताफ़ हुसैन आलिम लखनवी
-
अरशद सिद्दीक़ी
-
शाज़ तमकनत
-
मेला राम वफ़ा
-
नसीम अजमल
-
पयाम फ़तेहपुरी
-
दिल अय्यूबी
-
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
-
क़तील शिफ़ाई
-
निकहत बरेलवी
-
मुनीर भोपाली
-
वजाहत अली संदैलवी
-
नातिक़ गुलावठी
-
मयकश अकबराबादी