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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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चरण सिंह बशर

1957 | लखनऊ, भारत

चरण सिंह बशर

ग़ज़ल 15

अशआर 6

ये दुनिया नफ़रतों के आख़री स्टेज पे है

इलाज इस का मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं है

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अगर ज़िंदा ही रहना है तो रहिए अपनी शर्तों पर

कि ख़ुद्दारी से ख़ाली लोग सौ सौ बार मरते हैं

कोई बस्ती में बशर जैसा नज़र आता नहीं

सख़्त उलझन में हैं वीराने किसे आवाज़ दें

दंगे में तो हलाक हुए बे-शुमार लोग

कल किस तरह छपेगी ख़बर देखना ये है

दूर तक उम्मीद की कोई किरन बाक़ी नहीं

हो चुके अपने भी बेगाने किसे आवाज़ दें

पुस्तकें 1

 

चित्र शायरी 1

 

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