हमज़ा बिलाल के शेर
न रावन है कहानी में न सीता ज़िंदगानी में
मगर बनवास फिर भी चल रहा है क्या किया जाए
गिर्या-ओ-ज़ारी का सामान उठा लेते हैं
हिज्र में 'मीर' का दीवान उठा लेते हैं
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टैग : मीर तक़ी मीर
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