एम. नसरुल्लाह नसर के शेर
वो आना चाहता है मेरे दिल में
मगर कोई बहाना चाहता है
ख़ैर को ख़ैर शर को शर कहना
सर क़लम हो तो हो मगर कहना
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere