माहिर अब्दुल हई के शेर
रात की रंगीनियाँ मुँह देखती रह जाएँगी
हम थकन से चूर नंगे फ़र्श पर सो जाएँगे
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टैग : रात
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आज रोने की जगह पर जिन को आती है हँसी
कल वही हँसने के मौक़े पर लहू रो जाएँगे
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टैग : गिर्या-ओ-ज़ारी
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