परवीन शग़फ़ का परिचय
परवीन शग़फ़ समकालीन उर्दू शायरी की एक संवेदनशील, गरिमामयी और प्रभावशाली स्त्री स्वर हैं। उनका मूल नाम शगुफ़्ता परवीन है। उनका जन्म 14 मई 1980 को बिहार शरीफ़, ज़िला नालंदा (बिहार) में हुआ। प्रारम्भिक परवरिश और शिक्षा कोलकाता में हुई तथा वर्तमान में वे कई वर्षों से दिल्ली में निवास कर रही हैं। उन्होंने उर्दू में बी.ए. किया और बाद में साहित्यिक एवं रचनात्मक गतिविधियों के साथ अपनी उच्च शिक्षा का सिलसिला भी जारी रखा।
परवीन शग़फ़ की शायरी में जीवन के कटु-मधुर अनुभव, आंतरिक पीड़ा, प्रेम, समर्पण, स्त्री-संवेदनाएँ और सामाजिक रवैयों की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है। उनका पहला काव्य-संग्रह “ज़िंदान” वर्ष 2024 में प्रकाशित हुआ, जिसे साहित्यिक जगत में विशेष सराहना प्राप्त हुई। उनके कलाम को कई प्रसिद्ध गायकों ने अपनी आवाज़ दी है और वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुशायरों, साहित्यिक आयोजनों, आकाशवाणी तथा दूरदर्शन के कार्यक्रमों में भी अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं।
शायरी के अतिरिक्त उन्होंने गद्य में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके अफ़सांचे, लेख तथा साहित्यिक व्यक्तित्वों पर लिखे गए आलेख देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। उन्होंने असद बदायूँनी के कलाम को देवनागरी लिपि में “तुझसे बिछड़ के” शीर्षक से संपादित किया है, जबकि असद बदायूँनी के जीवन, साहित्यिक सेवाओं और आलोचनात्मक लेखों पर आधारित पुस्तक “ग़मज़दा और भी हैं शहर में” प्रकाशनाधीन है।
परवीन शग़फ़ विभिन्न सामाजिक और साहित्यिक गतिविधियों से भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। वे ‘सॉलिटेयर लिटरेचर फ़ाउंडेशन’ की अध्यक्ष हैं तथा त्रैमासिक डिजिटल पत्रिका “मौज-ए-ख़याल” की सलाहकार समिति की सदस्य हैं। उनकी साहित्यिक सेवाओं के सम्मान में उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है, जिनमें आलमी अदबियात उर्दू लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (ब्रिटेन, 2023) और इंडिया पोएट्स कॉन्फ़्रेंस क़तर अवॉर्ड (2023) उल्लेखनीय हैं।