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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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परवीन शाकिर

1952 - 1994 | कराची, पाकिस्तान

उर्दू की सबसे लोकप्रिय शायरात में शामिल। स्त्रियों की भावनाओं को आवाज़ देने के लिए मशहूर

उर्दू की सबसे लोकप्रिय शायरात में शामिल। स्त्रियों की भावनाओं को आवाज़ देने के लिए मशहूर

परवीन शाकिर

ग़ज़ल 93

नज़्म 39

अशआर 110

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा

मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा

हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ

दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं

मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी

वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा

वो कहीं भी गया लौटा तो मिरे पास आया

बस यही बात है अच्छी मिरे हरजाई की

कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उस ने

बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की

उद्धरण 1

मेरा गुनाह यह है कि मैं एक ऐसे क़बीले में पैदा हुई जहाँ सोच रखना जुर्म में शामिल है, मगर क़बीले वालों से भूल यह हुई कि उन्होंने मुझे पैदा होते ही ज़मीन में नहीं गाड़ा और अब मुझे दीवार में चुन देना इनके लिए अख़लाक़ी तौर पर इतना आसान नहीं रहा।

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क़ितआ 1

 

नस्री-नज़्म 1

 

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अपनी तन्हाई मिरे नाम पे आबाद करे

अपनी रुस्वाई तिरे नाम का चर्चा देखूँ

अश्क आँख में फिर अटक रहा है

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