शाहिद इश्क़ी के शेर
हम से नफ़रत करो कि प्यार करो
कोई रिश्ता तो उस्तुवार करो
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मिला न था तो गुमाँ उस पे था फ़रिश्तों का
जो अब मिला है तो लगता है आदमी की तरह
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