सुहा मुजद्ददी
ग़ज़ल 6
अशआर 1
ऑडियो 5
इसी आशिक़ी में पैहम हुई ख़ानुमाँ-ख़राबी
उठिए तो कहाँ जाइए जो कुछ है यहीं है
ख़राब-ए-दीद को यूँ ही ख़राब रहने दे
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