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शायरी- शायरों की आवाज़ में



poet imageअब्दुल अहद साज़
  1. सबक़ उम्र का या ज़माने का है
  2. मौत से आगे सोच के आना फिर जी लेना
  3. बे-मसरफ़ बे-हासिल दुख
  4. हर इक लम्हे की रग में दर्द का रिश्ता धड़कता है
  5. जाने क़लम की आँख में किस का ज़ुहूर था
  6. बंद फ़सीलें शहर की तोड़ें ज़ात की गिरहें खोलें
  7. यूँ भी दिल अहबाब के हम ने गाहे गाहे रक्खे थे
  8. हम अपने ज़ख़्म कुरेदते हैं वो ज़ख़्म पराए धोते थे
  9. दरख़्त रूह के झूमे परिंद गाने लगे
  10. खिले हैं फूल की सूरत तिरे विसाल के दिन
  11. बहुत मलूल बड़े शादमाँ गए हुए हैं
  12. लफ़्ज़ों के सहरा में क्या मा'नी के सराब दिखाना भी
  13. ख़राब-ए-दर्द हुए ग़म-परस्तियों में रहे
  14. खुली जब आँख तो देखा कि दुनिया सर पे रक्खी है
  15. जीतने मारका-ए-दिल वो लगातार गया
  16. मिज़ाज-ए-सहल-तलब अपना रुख़्सतें माँगे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
  1. मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग
  2. ऐ रौशनियों के शहर
  3. तौक़-ओ-दार का मौसम
  4. बुनियाद कुछ तो हो
  5. रह-ए-ख़िज़ाँ में तलाश-ए-बहार करते रहे
  6. तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
  7. बे-दम हुए बीमार दवा क्यूँ नहीं देते
  8. हम जो तारीक राहों में मारे गए
  9. दुआ
  10. किस हर्फ़ पे तू ने गोश-ए-लब ऐ जान-ए-जहाँ ग़म्माज़ किया
  11. सुब्ह-ए-आज़ादी (अगस्त-47)
  12. रंग है दिल का मिरे
  13. ज़िंदाँ की एक सुब्ह
  14. जब तेरी समुंदर आँखों में
  15. सोचने दो
  16. चंद रोज़ और मिरी जान
  17. वफ़ा-ए-वादा नहीं वादा-ए-दिगर भी नहीं
  18. गर्मी-ए-शौक़-ए-नज़ारा का असर तो देखो
  19. तराना
  20. शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम
  21. मुलाक़ात
  22. कहाँ जाओगे
  23. ख़त्म हुई बारिश-ए-संग
  24. तेरी सूरत जो दिल-नशीं की है
  25. शीशों का मसीहा कोई नहीं
  26. पास रहो
  27. न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है
  28. ये किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया
  29. दो इश्क़
  30. दरीचा
  31. बोल
  32. किए आरज़ू से पैमाँ जो मआल तक न पहुँचे
  33. अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें
  34. लहू का सुराग़
  35. निसार मैं तेरी गलियों के
  36. यहाँ से शहर को देखो
  37. ज़िंदाँ की एक शाम
  38. दर्द आएगा दबे पाँव
इफ़्तिख़ार आरिफ़
  1. और हवा चुप रही
  2. इल्तिजा
  3. शहर-आशोब
  4. गली-कूचों में हंगामा बपा करना पड़ेगा
  5. कहाँ के नाम ओ नसब इल्म क्या फ़ज़ीलत क्या
  6. ये बस्ती जानी-पहचानी बहुत है
  7. शहर-ए-गुल के ख़स-ओ-ख़ाशाक से ख़ौफ़ आता है
  8. बन-बास
  9. अभी कुछ दिन लगेंगे
  10. एक ख़्वाब की दूरी पर
  11. जैसा हूँ वैसा क्यूँ हूँ समझा सकता था मैं
  12. दयार-ए-नूर में तीरा-शबों का साथी हो
  13. ज़रा सी देर को आए थे ख़्वाब आँखों में
  14. थकन तो अगले सफ़र के लिए बहाना था
  15. सहरा में एक शाम
  16. पुराने दुश्मन
  17. एक उदास शाम के नाम
  18. बैलन्स-शीट
  19. हिज्र की धूप में छाँव जैसी बातें करते हैं
  20. समुंदर इस क़दर शोरीदा-सर क्यूँ लग रहा है
  21. मुल्क-ए-सुख़न में दर्द की दौलत को क्या हुआ
  22. ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है
  23. ग़म-ए-जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए
  24. शिकस्त
  25. अब भी तौहीन-ए-इताअत नहीं होगी हम से
  26. शहर इल्म के दरवाज़े पर
  27. ये मो'जिज़ा भी किसी की दुआ का लगता है
  28. अज़ाब-ए-वहशत-ए-जाँ का सिला न माँगे कोई
  29. ये क़र्ज़-ए-कज-कुलही कब तलक अदा होगा
  30. सुख़न-ए-हक़ को फ़ज़ीलत नहीं मिलने वाली
  31. अबू-तालिब के बेटे
  32. इंतिबाह
  33. ग़ैरों से दाद-ए-जौर-ओ-जफ़ा ली गई तो क्या
  34. मंज़र से हैं न दीदा-ए-बीना के दम से हैं
  35. बारहवाँ खिलाड़ी
  36. ख़्वाब-ए-देरीना से रुख़्सत का सबब पूछते हैं
  37. शिकस्ता-पर जुनूँ को आज़माएँगे नहीं क्या
  38. सितारों से भरा ये आसमाँ कैसा लगेगा
  39. सितारा-वार जले फिर बुझा दिए गए हम
  40. वफ़ा की ख़ैर मनाता हूँ बेवफ़ाई में भी
  41. एक सवाल
  42. इन्हीं में जीते इन्हीं बस्तियों में मर रहते
  43. मेरा मालिक जब तौफ़ीक़ अर्ज़ानी करता है
  44. कूच
  45. कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहजे में
  46. ये बस्तियाँ हैं कि मक़्तल दुआ किए जाएँ
  47. आख़िरी आदमी का रजज़
  48. बद-शुगूनी
  49. उमीद-ओ-बीम के मेहवर से हट के देखते हैं
  50. मुकालिमा
  51. सर-ए-बाम-ए-हिज्र दिया बुझा तो ख़बर हुई
  52. मोहब्बत की एक नज़्म
  53. दुआ
  54. फ़ज़ा में वहशत-ए-संग-ओ-सिनाँ के होते हुए
  55. दुख और तरह के हैं दुआ और तरह की
  56. तार-ए-शबनम की तरह सूरत-ए-ख़स टूटती है
  57. अज़ाब ये भी किसी और पर नहीं आया
  58. समझ रहे हैं मगर बोलने का यारा नहीं
  59. एक रुख़
  60. बिखर जाएँगे हम क्या जब तमाशा ख़त्म होगा
  61. बस्ती भी समुंदर भी बयाबाँ भी मिरा है
  62. गुमनाम सिपाही की क़ब्र पर
  63. ये अब खुला कि कोई भी मंज़र मिरा न था
  64. ग़म-ए-जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए
  65. हामी भी न थे मुंकिर-ए-'ग़ालिब' भी नहीं थे
  66. मिरे ख़ुदा मुझे इतना तो मो'तबर कर दे
किश्वर नाहीद
  1. घास तो मुझ जैसी है
  2. ऐ रह-ए-हिज्र-ए-नौ-फ़रोज़ देख कि हम ठहर गए
  3. बिगड़ी बात बनाना मुश्किल बड़ी बात बनाए कौन
  4. एक ही आवाज़ पर वापस पलट आएँगे लोग
  5. दिल को भी ग़म का सलीक़ा न था पहले पहले
  6. उम्र में उस से बड़ी थी लेकिन पहले टूट के बिखरी मैं
  7. तिरे क़रीब पहुँचने के ढंग आते थे
  8. तुझ से वादा अज़ीज़-तर रक्खा
  9. मुझे भुला के मुझे याद भी रखा तू ने
  10. सोने से पहले एक ख़याल
  11. गिलास लैंडस्केप
  12. हवा कुछ अपने सवाल तहरीर देखती है
  13. तलाश दरिया की थी ब-ज़ाहिर सराब देखा
  14. हम गुनहगार औरतें
  15. विदा करता है दिल सतवत-ए-रग-ए-जाँ को
  16. मिरी आँखों में दरिया झूलता है
  17. ज़ेहन रहता है बदन ख़्वाब के दम तक उस का
  18. ख़ुदाओं से कह दो
  19. कुछ दिन तो मलाल उस का हक़ था
  20. सुलगती रेत पे आँखें भी ज़ेर-ए-पा रखना
  21. ये हौसला तुझे महताब-ए-जाँ हुआ कैसे
महताब हैदर नक़वी
  1. अहल-ए-दुनिया देखते हैं कितनी हैरानी के साथ
  2. किसी के घर न माह ओ साल के मौसम में रहते हैं
  3. किसी के ख़्वाब से बाक़ी न बेदारी से क़ाएम है
  4. अब रहे या न रहे कोई मलाल-ए-दुनिया
  5. मुख़्तसर सी ज़िंदगी में कितनी नादानी करे
  6. हिज्र की मंज़िल हमें अब के पसंद आई नहीं
  7. मतलब के लिए हैं न मआनी के लिए हैं
  8. यूँ ही सर चढ़ के हर इक मौज-ए-बला बोलेगी
  9. अगर कोई ख़लिश-ए-जावेदाँ सलामत है
  10. तेरा चेहरा न मिरा हुस्न-ए-नज़र है सब कुछ
  11. अपनी ख़ातिर सितम ईजाद भी हम करते हैं
  12. ये जहाँ ख़ूब है सब इस के नज़ारे अच्छे
  13. एक तूफ़ान का सामान बनी है कोई चीज़
  14. अपनी ख़ातिर सितम ईजाद भी हम करते हैं
  15. एक पल में दम-ए-गुफ़्तार से लब-ए-तर हो जाए
  16. उसी दर्द-आश्ना दिल की तरफ़-दारी में रहते हैं
मजरूह सुल्तानपुरी
  1. गो रात मिरी सुब्ह की महरम तो नहीं है
  2. मुझ से कहा जिब्रील-ए-जुनूँ ने ये भी वही-ए-इलाही है
  3. हमें शुऊर-ए-जुनूँ है कि जिस चमन में रहे
  4. मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए
  5. सू-ए-मक़्तल कि पए सैर-ए-चमन जाते हैं
  6. चमन है मक़्तल-ए-नग़्मा अब और क्या कहिए
  7. मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए
  8. हमें शुऊर-ए-जुनूँ है कि जिस चमन में रहे
  9. चमन है मक़्तल-ए-नग़्मा अब और क्या कहिए
  10. आ निकल के मैदाँ में दो-रुख़ी के ख़ाने से
  11. हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह
  12. दुश्मन की दोस्ती है अब अहल-ए-वतन के साथ
  13. हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़ियादा
  14. जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले
  15. दस्त-ए-मुनइम मिरी मेहनत का ख़रीदार सही
  16. सू-ए-मक़्तल कि पए सैर-ए-चमन जाते हैं
  17. हमें शुऊर-ए-जुनूँ है कि जिस चमन में रहे
  18. हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह
  19. आ निकल के मैदाँ में दो-रुख़ी के ख़ाने से
  20. अहल-ए-तूफ़ाँ आओ दिल-वालों का अफ़्साना कहें
  21. जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले
  22. ब-नाम-ए-कूचा-ए-दिलदार गुल बरसे कि संग आए
शमीम हनफ़ी
  1. कई रातों से बस इक शोर सा कुछ सर में रहता है
  2. लक़ड़हारे तुम्हारे खेल अब अच्छे नहीं लगते
  3. सूरज धीरे धीरे पिघला फिर तारों में ढलने लगा
  4. किताब पढ़ते रहे और उदास होते रहे
  5. अब क़ैस है कोई न कोई आबला-पा है
  6. रोज़ ओ शब की गुत्थियाँ आँखों को सुलझाने न दे
  7. आना उसी का बज़्म से जाना उसी का है
  8. बंद कर ले खिड़कियाँ यूँ रात को बाहर न देख
  9. शोला शोला थी हवा शीशा-ए-शब से पूछो
  10. बस एक वहम सताता है बार बार मुझे
  11. ऐसे कई सवाल हैं जिन का जवाब कुछ नहीं
  12. वो एक शोर सा ज़िंदाँ में रात भर क्या था
  13. बंद कर के खिड़कियाँ यूँ रात को बाहर न देख
  14. शाम आई सेहन-ए-जाँ में ख़ौफ़ का बिस्तर लगा
  15. फिर लौट के इस बज़्म में आने के नहीं हैं
  16. कभी सहरा में रहते हैं कभी पानी में रहते हैं
  17. ज़ेर-ए-ज़मीं दबी हुई ख़ाक को आसाँ कहो
  18. हर नक़्श-ए-नवा लौट के जाने के लिए था
  19. नीले पीले सियाह सुर्ख़ सफ़ेद सब थे शामिल इसी तमाशे में
  20. इस तरह इश्क़ में बर्बाद नहीं रह सकते
  21. तिलिस्म है कि तमाशा है काएनात उस की
सुल्तान अख़्तर
  1. ख़ाक उड़ती है ख़रीदार कहाँ खो गए हैं
  2. छीन ले क़ुव्वत बीनाई ख़ुदाया मुझ से
  3. मुसीबत में भी ग़ैरत-आश्ना ख़ामोश रहती है
  4. हरीफ़-ए-वक़्त हूँ सब से जुदा है राह मिरी
  5. ख़ाना-बर्बाद हुए बे-दर-ओ-दीवार रहे
  6. सरसब्ज़ मौसमों का असर ले गया कोई
  7. रक़्स करता है ब-अंदाज़-ए-जुनूँ दौड़ता है
  8. सिलसिला मेरे सफ़र का कभी टूटा ही नहीं
  9. रक़्स-ए-ताऊस-ए-तमन्ना नहीं होने वाला
  10. अपनी तहज़ीब की दीवार सँभाले हुए हैं
  11. हम मुतमइन हैं उस की रज़ा के बग़ैर भी
  12. मैं लड़खड़ाया तो मुझ को गले लगाने लगे
  13. ये जो हम अतलस ओ किम-ख़्वाब लिए फिरते हैं
  14. काम आती नहीं अब कोई तदबीर हमारी
  15. मिरी क़दीम रिवायत को आज़माने लगे
  16. ख़्वाब आँखों से चुने नींद को वीरान किया
पीरज़ादा क़ासीम
  1. इक सज़ा और असीरों को सुना दी जाए
  2. ज़िंदगी ने झेले हैं सब अज़ाब दुनिया के
  3. अयाँ हम पर न होने की ख़ुशी होने लगी है
  4. अदाकारी में भी सौ कर्ब के पहलू निकल आए
  5. सानेहा नहीं टलता सानेहे पे रोने से
  6. मैं कब से अपनी तलाश में हूँ मिला नहीं हूँ
  7. ख़ून से जब जला दिया एक दिया बुझा हुआ
  8. कौन गुमाँ यक़ीं बना कौन सा घाव भर गया
  9. चराग़ हूँ कब से जल रहा हूँ मुझे दुआओं में याद रखिए
  10. ज़ख़्म दबे तो फिर नया तीर चला दिया करो
  11. अब हर्फ़-ए-तमन्ना को समाअत न मिलेगी
  12. ग़म से बहल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं
  13. घर की जब याद सदा दे तो पलट कर आ जाएँ
  14. ख़िर्मन-ए-जाँ के लिए ख़ुद ही शरर हो गए हम
  15. इक सज़ा और असीरों को सुना दी जाए
  16. दिल अगर कुछ माँग लेने की इजाज़त माँगता