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ग़मगीन देहलवी

1753 - 1851

प्रतिष्ठित सूफी शायर जिनसे मिर्ज़ा ग़ालिब को श्रद्धा थी

प्रतिष्ठित सूफी शायर जिनसे मिर्ज़ा ग़ालिब को श्रद्धा थी

ग़ज़ल 10

शेर 9

जाम ले कर मुझ से वो कहता है अपने मुँह को फेर

रू-ब-रू यूँ तेरे मय पीने से शरमाते हैं हम

वो लुत्फ़ उठाएगा सफ़र का

आप-अपने में जो सफ़र करेगा

मेरी ये आरज़ू है वक़्त-ए-मर्ग

उस की आवाज़ कान में आवे

पुस्तकें 6

ग़ालिब और ग़मगीन के फ़ारसी मक्तूबात

 

2012

Hazrat Ghamgeen Dehlvi

 

2017

Makashafat-ul-Asrar

Deewan-e-Rubaiyat

2008

Makhzan-ul-Asrar

 

1966

Makhzan-ul-Asrar

 

2009

Meer Syed Ali Ghamgeen Dehlvi : Hayat, Shakhsiyat Aur Shairi

 

2008