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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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स्मृति

पुण्य तिथि

क्लासिकी लहजे के प्रमुख और लोकप्रिय शायर

ग़म-ए-दिल ही ग़म-ए-दौराँ ग़म-ए-जानाना बनता है

यही ग़म शेर बनता है यही अफ़्साना बनता है

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