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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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जश्न

जन्मदिन

प्रख्यात पूर्व-आधुनिक शायर, जिगर मुरादाबादी के समकालीन।

क्यूँ किसी रह-रौ से पूछूँ अपनी मंज़िल का पता

मौज-ए-दरिया ख़ुद लगा लेती है साहिल का पता

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