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आरज़ू लखनवी

1873 - 1951 | कराची, पाकिस्तान

प्रख्यात पूर्व-आधुनिक शायर, जिगर मुरादाबादी के समकालीन।

प्रख्यात पूर्व-आधुनिक शायर, जिगर मुरादाबादी के समकालीन।

ग़ज़ल 64

नज़्म 1

 

शेर 89

पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह

ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँ

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बुरी सरिश्त बदली जगह बदलने से

चमन में के भी काँटा गुलाब हो सका

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किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी

झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी

रुबाई 5

 

पुस्तकें 37

Adal-e-Mahmood

 

 

Arzoo Lakhnavi: Hayat Aur Karname

 

1978

Arzoo Lakhnawi

Hayat Aur Karname

1978

Arzoo Lucknowi

Intikhab-e-Kalam-e-Arzoo Lucknowi

1966

Dastan-e-Arzoo

 

1950

फ़ुग़ान-ए-अारज़ू

 

 

Fughan-e-Aarzu

 

 

फ़ुग़ान-ए-आरज़ू

 

1981

Fughan-e-Arzu

 

1981

ग़ज़लियात

 

 

चित्र शायरी 4

पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँ

पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँ

वफ़ा तुम से करेंगे दुख सहेंगे नाज़ उठाएँगे जिसे आता है दिल देना उसे हर काम आता है

पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँ

 

वीडियो 3

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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