Sajjad Baqar Rizvi's Photo'

सज्जाद बाक़र रिज़वी

1928 - 1993 | कराची, पाकिस्तान

ग़ज़ल 57

नज़्म 6

शेर 16

टूट पड़ती थीं घटाएँ जिन की आँखें देख कर

वो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए

मैं हम-नफ़साँ जिस्म हूँ वो जाँ की तरह था

मैं दर्द हूँ वो दर्द के उनवाँ की तरह था

पहले चादर की हवस में पाँव फैलाए बहुत

अब ये दुख है पाँव क्यूँ चादर से बाहर गया

पुस्तकें 2

Maghribi Tanqeed Ke Usool

 

1985

 

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