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सलीम अहमद

1927 - 1983 | कराची, पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रमुखतम आलोचकों में विख्यात/ऐंटी-गज़ल रूझान और आधुनिकता-विरोधी विचारों के लिए प्रसिद्ध

पाकिस्तान के प्रमुखतम आलोचकों में विख्यात/ऐंटी-गज़ल रूझान और आधुनिकता-विरोधी विचारों के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 62

नज़्म 20

शेर 68

निकल गए हैं जो बादल बरसने वाले थे

ये शहर आब को तरसेगा चश्म-ए-तर के बग़ैर

दर-ब-दर ठोकरें खाईं तो ये मालूम हुआ

घर किसे कहते हैं क्या चीज़ है बे-घर होना

उस एक चेहरे में आबाद थे कई चेहरे

उस एक शख़्स में किस किस को देखता था मैं

ई-पुस्तक 16

चराग़-ए-नीम शब

 

1985

Mazameen-e-Saleem Ahmad

 

2009

Rashhat

 

2015

चित्र शायरी 2

मंज़िल का पता है न किसी राहगुज़र का बस एक थकन है कि जो हासिल है सफ़र का

 

वीडियो 11

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

सलीम अहमद

titli ne kaha tha mashrik mashrik hai

सलीम अहमद

दिलों में दर्द भरता आँख में गौहर बनाता हूँ

सलीम अहमद

जाने किसी ने क्या कहा तेज़ हवा के शोर में

सलीम अहमद

जाने किसी ने क्या कहा तेज़ हवा के शोर में

सलीम अहमद

तिरे साँचे में ढलता जा रहा हूँ

सलीम अहमद

दिल के अंदर दर्द आँखों में नमी बन जाइए

सलीम अहमद

दिल हुस्न को दान दे रहा हूँ

सलीम अहमद

मैं सर छुपाऊँ कहाँ साया-ए-नज़र के बग़ैर

सलीम अहमद

मैं सर छुपाऊँ कहाँ साया-ए-नज़र के बग़ैर

सलीम अहमद

मशरिक़ हार गया

'किपलिंग' ने कहा था सलीम अहमद

ऑडियो 17

मैं सर छुपाऊँ कहाँ साया-ए-नज़र के बग़ैर

कोई सितारा-ए-गिर्दाब आश्ना था मैं

जाने किसी ने क्या कहा तेज़ हवा के शोर में

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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