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नासिर काज़मी

1923 - 1972 | लाहौर, पाकिस्तान

आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के संस्थापकों में से एक। भारत के शहर अंबाला में पैदा हुए और पाकिस्तान चले गए जहाँ बटवारे के दुख दर्द उनकी शायरी का केंद्रीय विषय बन गए।

आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के संस्थापकों में से एक। भारत के शहर अंबाला में पैदा हुए और पाकिस्तान चले गए जहाँ बटवारे के दुख दर्द उनकी शायरी का केंद्रीय विषय बन गए।

नासिर काज़मी

ग़ज़ल 111

शेर 77

दिल धड़कने का सबब याद आया

वो तिरी याद थी अब याद आया

आज देखा है तुझ को देर के बअ'द

आज का दिन गुज़र जाए कहीं

वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का

जो पिछली रात से याद रहा है

आरज़ू है कि तू यहाँ आए

और फिर उम्र भर जाए कहीं

दोस्त हम ने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद

महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी कभी

पुस्तकें 46

Atthara Sau Sattawan

Khayal Number

2007

Barg-e-Nai

 

1990

Barg-e-Nai

 

1998

Deewan

 

1976

Deewan

 

1977

Deewan

 

1992

Deewan

 

1977

Deewan

 

2003

Deewan

 

1984

Deewan

 

1991

चित्र शायरी 33

दयार-ए-दिल की रात में चराग़ सा जला गया मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक्ल तो दिखा गया वो दोस्ती तो ख़ैर अब नसीब-ए-दुश्मनाँ हुई वो छोटी छोटी रंजिशों का लुत्फ़ भी चला गया जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया पुकारती हैं फ़ुर्सतें कहाँ गईं वो सोहबतें ज़मीं निगल गई उन्हें कि आसमान खा गया ये सुब्ह की सफ़ेदियाँ ये दोपहर की ज़र्दियाँ अब आइने में देखता हूँ मैं कहाँ चला गया ये किस ख़ुशी की रेत पर ग़मों को नींद आ गई वो लहर किस तरफ़ गई ये मैं कहाँ समा गया गए दिनों की लाश पर पड़े रहोगे कब तलक अलम-कशो उठो कि आफ़्ताब सर पे आ गया

कपड़े बदल कर बाल बना कर कहाँ चले हो किस के लिए रात बहुत काली है 'नासिर' घर में रहो तो बेहतर है

वीडियो 57

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
गली गली मिरी याद बिछी है प्यारे रस्ता देख के चल

नासिर काज़मी

तू असीर-ए-बज़्म है हम-सुख़न तुझे ज़ौक़-ए-नाला-ए-नय नहीं

नासिर काज़मी

दयार-ए-दिल की रात में चराग़ सा जला गया

नासिर काज़मी

वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए

नासिर काज़मी

ऑडियो 59

अपनी धुन में रहता हूँ

अपनी धुन में रहता हूँ

अव्वलीं चाँद ने क्या बात सुझाई मुझ को

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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