Shaheen Abbas's Photo'

शाहीन अब्बास

1965 | लाहौर, पाकिस्तान

पुस्तकें 1

Daras Dhara

 

2014

 

चित्र शायरी 1

ज़मीं का आख़िरी मंज़र दिखाई देने लगा मैं देखता हुआ पत्थर दिखाई देने लगा वो सामने था तो कम कम दिखाई देता था चला गया तो बराबर दिखाई देने लगा निशान-ए-हिज्र भी है वस्ल की निशानियों में कहाँ का ज़ख़्म कहाँ पर दिखाई देने लगा वो इस तरह से मुझे देखता हुआ गुज़रा मैं अपने आप को बेहतर दिखाई देने लगा तुझे ख़बर ही नहीं रात मो'जिज़ा जो हुआ अँधेरे को, तुझे छू कर, दिखाई देने लगा कुछ इतने ग़ौर से देखा चराग़ जलता हुआ कि मैं चराग़ के अंदर दिखाई देने लगा पहुँच गया तिरी आँखों के उस किनारे तक जहाँ से मुझ को समुंदर दिखाई देने लगा

 

"लाहौर" के और शायर

  • अल्लामा इक़बाल अल्लामा इक़बाल
  • नासिर काज़मी नासिर काज़मी
  • शहज़ाद अहमद शहज़ाद अहमद
  • फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
  • हफ़ीज़ जालंधरी हफ़ीज़ जालंधरी
  • अमजद इस्लाम अमजद अमजद इस्लाम अमजद
  • अब्बास ताबिश अब्बास ताबिश
  • वसी शाह वसी शाह
  • नबील अहमद नबील नबील अहमद नबील
  • अहमद नदीम क़ासमी अहमद नदीम क़ासमी