नज़ीर क़ैसर

ग़ज़ल 33

शेर 18

बरस रही थी बारिश बाहर

और वो भीग रहा था मुझ में

यूँ तुझे देख के चौंक उठती हैं सोई यादें

जैसे सन्नाटे में आवाज़ लगा दे कोई

कोई मुझ को ढूँढने वाला

भूल गया है रस्ता मुझ में

बिखरता जाता है कमरे में सिगरटों का धुआँ

पड़ा है ख़्वाब कोई चाय की प्याली में

बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दी

आज मुझ को भी ख़ुदा अच्छा लगा

पुस्तकें 2

 

"लाहौर" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI