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मुनीर नियाज़ी

1923 - 2006 | लाहौर, पाकिस्तान

पाकिस्तान के आग्रणी आधुनिक शायरों में विख्यात/फि़ल्मों के लिए गीत भी लिखे

पाकिस्तान के आग्रणी आधुनिक शायरों में विख्यात/फि़ल्मों के लिए गीत भी लिखे

ग़ज़ल 93

नज़्म 56

शेर 114

किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते

सवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते

आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए

वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है

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अब कौन मुंतज़िर है हमारे लिए वहाँ

शाम गई है लौट के घर जाएँ हम तो क्या

दोहा 1

डूब चला है ज़हर में उस की आँखों का हर रूप

दीवारों पर फैल रही है फीकी फीकी धूप

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ई-पुस्तक 14

Aaghaz-e-Zamistan Mein Dubara

 

 

Chha Rangin Darwaze

 

 

Dushmanon Ke Darmiyan Sham

 

1975

Ek Lamha Tez Safar Ka

 

 

Jungle Mein Dhanak

 

 

Kulliyat-e-Muneer

 

 

Kulliyat-e-Muneer

 

1986

Mah-e-Muneer

 

1974

Mah-e-Muneer

 

1980

Pahli Baat Hi Aakhiri Thi

 

1986

वीडियो 44

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
khwab o khayal-e-gul se kidhar jaye admi

मुनीर नियाज़ी

Munir Niazi - Nazm

मुनीर नियाज़ी

Munir Niazi Song "Aas Paas Koee Gaaon" Tufail Niazi Pakistani movie Dhoop Aur Saayay

मुनीर नियाज़ी

Munir Niazi Song "Jaa Apnee Hasraton per" Noor Jehan Music: Hasan Latif Pakistani movie Susraal

मुनीर नियाज़ी

Reciting his own poetry

मुनीर नियाज़ी

Reciting his own poetry

मुनीर नियाज़ी

TAHIRA SYED - Aaye Sheher Bemisal - A Tribute To Muneer Niazi - Ptv Live

मुनीर नियाज़ी

मुनीर नियाज़ी

इतने ख़ामोश भी रहा न करो

मुनीर नियाज़ी

उगा सब्ज़ा दर-ओ-दीवार पर आहिस्ता आहिस्ता

मुनीर नियाज़ी

कोई हद नहीं है कमाल की

मुनीर नियाज़ी

ख़याल जिस का था मुझे ख़याल में मिला मुझे

मुनीर नियाज़ी

देती नहीं अमाँ जो ज़मीं आसमाँ तो है

मुनीर नियाज़ी

बे-ख़याली में यूँही बस इक इरादा कर लिया

मुनीर नियाज़ी

बेचैन बहुत फिरना घबराए हुए रहना

मुनीर नियाज़ी

मेरी सारी ज़िंदगी को बे-समर उस ने किया

मुनीर नियाज़ी

सपना आगे जाता कैसे

छोटा सा इक गाँव था जिस में मुनीर नियाज़ी

हैं रवाँ उस राह पर जिस की कोई मंज़िल न हो

मुनीर नियाज़ी

हमेशा देर कर देता हूँ

हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में मुनीर नियाज़ी

ऑडियो 43

बेचैन बहुत फिरना घबराए हुए रहना

आ गई याद शाम ढलते ही

आइना अब जुदा नहीं करता

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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