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वसी शाह

1976 | लाहौर, पाकिस्तान

ग़ज़ल 53

शेर 14

तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छिन गई जब से

कोई भी लफ़्ज़ लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं

इस जुदाई में तुम अंदर से बिखर जाओगे

किसी मा'ज़ूर को देखोगे तो याद आऊँगा

जो तू नहीं है तो ये मुकम्मल हो सकेंगी

तिरी यही अहमियत है मेरी कहानियों में

ई-पुस्तक 2

Aankhen Bheeg Jati Hain

 

1997

Mohabbat Mustaqil Gham Hai

 

 

 

वीडियो 14

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वीडियो का सेक्शन
हास्य वीडियो
Aaraam se ek din kabhi ham baithe na ghar pe

वसी शाह

go zaKHmii hai.n ham par use kyaa Gam hai hamaaraa

वसी शाह

वसी शाह

ऑडियो 21

अपने एहसास से छू कर मुझे संदल कर दो

अपना तो चाहतों में यही इक उसूल है

अब जो लौटे हो इतने सालों में

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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