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अख़्तर शीरानी

1905 - 1948 | लाहौर, पाकिस्तान

सबसे लोकप्रिय उर्दू शायरों में से एक। गहरी रूमानी शायरी के लिए प्रसिद्ध

सबसे लोकप्रिय उर्दू शायरों में से एक। गहरी रूमानी शायरी के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 56

नज़्म 17

शेर 47

कूचा-ए-हुस्न छुटा तो हुए रुस्वा-ए-शराब

अपनी क़िस्मत में जो लिक्खी थी वो ख़्वारी गई

चमन वालों से मुझ सहरा-नशीं की बूद-ओ-बाश अच्छी

बहार कर चली जाती है वीरानी नहीं जाती

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है क़यामत तिरे शबाब का रंग

रंग बदलेगा फिर ज़माने का

ई-पुस्तक 26

Adabistan

 

1930

Akhtar Sheerani

 

1991

अख़्तर शीरानी और उनकी शायरी

 

1961

अख़्तर शीरानी और उसकी शायरी

 

1964

Akhtar Shirani: Intikhab-e-Kalam

 

1959

Akhtaristan

 

1946

Intikhab-e-Kalam Akhtar Sheerani

 

1959

Intikhab-e-Kalam-e-Akhtar Shirani

 

 

Jawame-ul-Hikayat-o-Lawame-ur-Riwayat

खण्ड-001

1943

Jawame-ul-Hikayat-o-Lawame-ur-Riwayat

भाग-002

1943

वीडियो 17

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Ai ishq hamen barbad na kar

मलिका पुखराज

Ai Ishq Humhein Barbad na Kar

नय्यरा नूर

Bhulaoge bahut lekin tumhen ham yaad

मुन्नी बेगम

Har ek jalwa e rangeen meri nigah mein hai

ताहिरा सैयद

ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर

ऐ इश्क़ न छेड़ आ आ के हमें हम भूले हुओं को याद न कर नय्यरा नूर

ओ देस से आने वाले बता

ओ देस से आने वाला है बता आबिदा परवीन

ओ देस से आने वाले बता

ओ देस से आने वाला है बता नासिर जहाँ

कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता

इक़बाल बानो

मैं आरज़ू-ए-जाँ लिखूँ या जान-ए-आरज़ू!

अज्ञात

मिरी शाम-ए-ग़म को वो बहला रहे हैं

मलिका पुखराज

वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए

ग़ुलाम अली

वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए

फ़रीदा ख़ानम

वो कहते हैं रंजिश की बातें भुला दें

ताहिरा सैयद

हर एक जल्वा-ए-रंगीं मिरी निगाह में है

अज्ञात

ऑडियो 13

मैं आरज़ू-ए-जाँ लिखूँ या जान-ए-आरज़ू!

आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या

उम्र भर की तल्ख़ बेदारी का सामाँ हो गईं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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