Bismil Saeedi's Photo'

बिस्मिल सईदी

1901 - 1976

क्लासिकी अंदाज़ के प्रमुख शायर / सीमाब अकबरकबादी के शागिर्द

क्लासिकी अंदाज़ के प्रमुख शायर / सीमाब अकबरकबादी के शागिर्द

ग़ज़ल 44

शेर 19

हम ने काँटों को भी नरमी से छुआ है अक्सर

लोग बेदर्द हैं फूलों को मसल देते हैं

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सर जिस पे झुक जाए उसे दर नहीं कहते

हर दर पे जो झुक जाए उसे सर नहीं कहते

किया तबाह तो दिल्ली ने भी बहुत 'बिस्मिल'

मगर ख़ुदा की क़सम लखनऊ ने लूट लिया

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पुस्तकें 11

Auraq-e-Zindagi

 

1971

औराक़-ए-ज़िन्दगी

 

1971

Auraq-e-Zindagi

 

1971

बिस्मिल सईदी अपने वतन में

 

1966

Bismil Saeedi: Shakhs Aur Shair

 

1976

कैफ़-ए-अलम

 

1953

Kulliyat-e-Bismil Saeedi

 

2007

Mushahidat

 

1960

Mushahidat

 

1960

Nishat-e-Gham

 

 

चित्र शायरी 1

हम ने काँटों को भी नरमी से छुआ है अक्सर लोग बेदर्द हैं फूलों को मसल देते हैं

 

ऑडियो 8

अब इश्क़ रहा न वो जुनूँ है

इश्क़ जो ना-गहाँ नहीं होता

कब से उलझ रहे हैं दम-ए-वापसीं से हम

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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