JaiKrishn Chaudhry Habeeb's Photo'

जयकृष्ण चौधरी हबीब

1904 | जबलपुर, भारत

उर्दू कवि, फ़ारसी और संस्कृत के विद्वान, स्वतंत्रता संग्राम में शामिल रहे

उर्दू कवि, फ़ारसी और संस्कृत के विद्वान, स्वतंत्रता संग्राम में शामिल रहे

जयकृष्ण चौधरी हबीब

ग़ज़ल 70

शेर 56

इंसाँ के दिल की ख़ैर ज़मीं आसमाँ की ख़ैर

हर रोज़ गुल खिलाते हैं इंसाँ नए नए

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या गुफ़्तुगू हो उन लब-ओ-रुख़्सार-ओ-ज़ुल्फ़ की

या उन ख़मोश नज़रों के लुत्फ़-ए-सुख़न की बात

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पा के इक तेरा तबस्सुम मुस्कुराई काएनात

झूम उट्ठा वो भी दिल जीने से जो बेज़ार था

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जुनूँ ही साथ रहे ज़िंदगी में मेरे 'हबीब'

सफ़र में और कोई हम-सफ़र मिले मिले

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हर इक क़दम पे ज़िंदगी है इंतिज़ार में

कितने ही मोड़ उभरेंगे हर इक सफ़र के साथ

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क़ितआ 21

पुस्तकें 1

Naghma-e-Zindagi

 

 

 

ऑडियो 9

jaikrishn chaudhrii habiib

उमीद-ए-दीद काम आए न आए

कभी तवील कभी मुख़्तसर भी होती है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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