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यगाना चंगेज़ी

1884 - 1956 | लखनऊ, भारत

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर जिन्होंने नई ग़ज़ल के लिए राह बनाई/मिर्ज़ा ग़ालिब के विरोध के लिए प्रसिद्ध

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर जिन्होंने नई ग़ज़ल के लिए राह बनाई/मिर्ज़ा ग़ालिब के विरोध के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 64

शेर 49

गुनाह गिन के मैं क्यूँ अपने दिल को छोटा करूँ

सुना है तेरे करम का कोई हिसाब नहीं

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मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा

मुझे सर मार कर तेशे से मर जाना नहीं आता

दर्द हो तो दवा भी मुमकिन है

वहम की क्या दवा करे कोई

रुबाई 31

पुस्तकें 31

Aayat-e-Wajdani

 

 

Aayat-e-Wajdani

 

1927

Aayat-e-Wijdani

 

1934

अायात-ए-विज्दानी

 

1927

Ayat-e-Wajdani

 

1945

Charagh-e-Sukhan

 

1921

चराग़-ए-सुख़न

 

1996

चराग़-ए-सुख़न

 

1915

Ganjeena

 

 

Ghalib Shikan

 

1934

चित्र शायरी 5

बैठा हूँ पाँव तोड़ के तदबीर देखना मंज़िल क़दम से लिपटी है तक़दीर देखना आवाज़े मुझ पे कसते हैं फिर बंदगान-ए-इश्क़ पड़ जाए फिर न पाँव में ज़ंजीर देखना मुर्दों से शर्त बाँध के सोई है अपनी मौत हाँ देखना ज़रा फ़लक-ए-पीर देखना होश उड़ न जाएँ सनअत-ए-बेहज़ाद देख कर आईना रख के सामने तस्वीर देखना परवाने कर चुके थे सर-अंजाम ख़ुद-कुशी फ़ानूस आड़े आ गया तक़दीर देखना शायद ख़ुदा-न-ख़ास्ता आँखें दग़ा करें अच्छा नहीं नविश्ता-ए-तक़दीर देखना बाद-ए-मुराद चल चुकी लंगर उठाओ 'यास' फिर आगे बढ़ के ख़ूबी-ए-तक़दीर देखना

क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई दिल न माने तो क्या करे कोई

क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई दिल न माने तो क्या करे कोई

मुझे दिल की ख़ता पर 'यास' शरमाना नहीं आता पराया जुर्म अपने नाम लिखवाना नहीं आता मुझे ऐ नाख़ुदा आख़िर किसी को मुँह दिखाना है बहाना कर के तन्हा पार उतर जाना नहीं आता मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा मुझे सर मार कर तेशे से मर जाना नहीं आता दिल-ए-बे-हौसला है इक ज़रा सी ठेस का मेहमाँ वो आँसू क्या पिएगा जिस को ग़म खाना नहीं आता सरापा राज़ हूँ मैं क्या बताऊँ कौन हूँ क्या हूँ समझता हूँ मगर दुनिया को समझाना नहीं आता

 

वीडियो 4

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ऑडियो 14

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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