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नज़ीर अकबराबादी

1735 - 1830 | आगरा, भारत

मीर तक़ी ' मीर ' के समकालीन अग्रणी शायर जिन्होंने भारतीय संस्कृति और त्योहारों पर नज्में लिखीं। होली , दीवाली , श्रीकृष्ण पर नज़्मों के लिए मशहूर

मीर तक़ी ' मीर ' के समकालीन अग्रणी शायर जिन्होंने भारतीय संस्कृति और त्योहारों पर नज्में लिखीं। होली , दीवाली , श्रीकृष्ण पर नज़्मों के लिए मशहूर

ग़ज़ल 216

नज़्म 19

शेर 102

कुछ हम को इम्तियाज़ नहीं साफ़ दुर्द का

साक़ियान-ए-बज़्म बयारीद हरचे हस्त

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पुकारा क़ासिद-ए-अश्क आज फ़ौज-ए-ग़म के हाथों से

हुआ ताराज पहले शहर-ए-जाँ दिल का नगर पीछे

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यूँ तो हम थे यूँही कुछ मिस्ल-ए-अनार-ओ-महताब

जब हमें आग दिखाए तो तमाशा निकला

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रुबाई 22

ई-पुस्तक 44

अशआर-ए-नज़ीर

 

1940

Bachchon Ke Nazeer

 

1959

Deewan-e-Nazeer

 

 

Deewan-e-Nazeer Akbarabadi

 

1942

Deewan-e-Nazeer Akbarabadi

 

 

Farhang-e-Nazeer

 

1991

इन्तिख़ाब नज़ीर अकबर आबादी

 

2001

Intikhab-e-Ghazliyat-e-Nazeer Akbarabadi

 

1994

इंतिख़ाब-ए-नज़ीर अकबराबादी

 

1985

Intikhab-e-Nazeer Akbarabadi

 

1970

वीडियो 20

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"Bahr-e-Taweel"

Zia Mohiuddin reads "Bahr-e-Taweel" nazeer akbarabadi ka likha hua ek sher hai jo be-inteha lamba hai. Ziya sahib ki khubsurat aawaaz mein us ka lutf dugna ho jaata hai. ज़िया मोहीउद्दीन

Ahl-e-Duniya

Diwali Nazm

अज्ञात

Khoon rez karishma naaz sitam

छाया गांगुली

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आदमी-नामा

दुनिया में पादशह है सो है वो भी आदमी हबीब तनवीर

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दुनिया में पादशह है सो है वो भी आदमी आबिद अली बेग

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दूर से आए थे साक़ी सुन के मय-ख़ाने को हम

निर्मला देवी

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बंजारा-नामा

टुक हिर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा अज्ञात

बंजारा-नामा

टुक हिर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा अज्ञात

बंजारा-नामा

टुक हिर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा मुकेश

बंजारा-नामा

टुक हिर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा मेहदी ज़हीर

रोटियाँ

जब आदमी के पेट में आती हैं रोटियाँ जसविंदर सिंह

होली

आ धमके ऐश ओ तरब क्या क्या जब हुस्न दिखाया होली ने अज्ञात

होली की बहारें

जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की छाया गांगुली

ऑडियो 8

उस के शरार-ए-हुस्न ने शो'ला जो इक दिखा दिया

न मैं दिल को अब हर मकाँ बेचता हूँ

नज़र पड़ा इक बुत-ए-परी-वश निराली सज-धज नई अदा का

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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