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बेख़ुद मोहानी

1883 - 1940 | लखनऊ, भारत

लोकप्रिय शायर, लेखक और टीकाकार. ग़ालिब के कलाम की व्याख्या के लिए मशहूर. ‘गंजीना-ए-तहक़ीक़’ नामक शायरी पर आलोचनात्मक लेखों का संग्रह प प्रकाशित हुआ

लोकप्रिय शायर, लेखक और टीकाकार. ग़ालिब के कलाम की व्याख्या के लिए मशहूर. ‘गंजीना-ए-तहक़ीक़’ नामक शायरी पर आलोचनात्मक लेखों का संग्रह प प्रकाशित हुआ

शेर 7

लज़्ज़त कभी थी अब तो मुसीबत सी हो गई

मुझ को गुनाह करने की आदत सी हो गई

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क्यूँ उलझते हो हर इक बात पे 'बेख़ुद' उन से

तुम भी नादान बने जाते हो नादान के साथ

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वहाँ अब साँस लेने की सदा आती है मुश्किल से

जो ज़िंदाँ गूँजता रहता था आवाज़-ए-सलासिल से

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पुस्तकें 8

Ganjeena-e-Tahqeeq

 

1979

Ganjeena-e-Tahqeeq

 

1979

गंजीना-ए-तहक़ीक़

 

 

Intikhab-e-Kalam-e-Bekhud Mohani

 

1983

Kulliyat-e-Bekhud

Urdu, Farsi Kalam

1987

कुल्लियात-ए-बेख़ुद

उर्दू,फ़ारसी कलाम

1942

Sharh-e-Deewan-e-Ghalib

 

1970

Sharh-e-Deewan-e-Ghalib

 

1970

 

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