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मनमोहन तल्ख़

1931 - 2001 | दिल्ली, भारत

प्रमुख आधुनिक शायर/यास यगाना चंगेज़ी के शार्गिद

प्रमुख आधुनिक शायर/यास यगाना चंगेज़ी के शार्गिद

ग़ज़ल 30

नज़्म 4

 

शेर 13

किसी के साथ होने के दुख भी झेले हैं

किसी के साथ मगर और भी अकेले हैं

दुनिया मेरी ज़िंदगी के दिन कम करती जाती है क्यूँ

ख़ून पसीना एक किया है ये मेरी मज़दूरी है

शिकायत और तो कुछ भी नहीं इन आँखों से

ज़रा सी बात पे पानी बहुत बरसता है

पुस्तकें 5

चराग़-ए-फ़िक्र

 

1857

जज़्बा-ओ-आवाज़

 

1970

Lapata

 

2001

Narayan Rao

 

1977

Takmeel

 

1997

Waseela

 

1999

 

ऑडियो 9

अभी शुऊर ने बस दुखती रग टटोली है

आएँ आँसू अगर आँखों में तो बस पी जाएँ

कुछ देर तो सब कुछ टूटने का माहौल रहा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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