Farhat Ehsas's Photo'

फ़रहत एहसास

1952 | दिल्ली, भारत

महत्वपूर्ण उत्तर-आधुनिक शायरों में विख्यात।

महत्वपूर्ण उत्तर-आधुनिक शायरों में विख्यात।

ग़ज़ल 151

नज़्म 25

शेर 79

इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के

अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के

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हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है

शहर में जो भी हुआ है वो ख़ता मेरी है

चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है

अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है

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क़ितआ 1

 

ई-पुस्तक 7

अफ़्कार-ए-ज़ाकिर

डाक्टर ज़ाकिर हुसैन की मुंतख़ब तहरीरें

2005

दाना-ए-राज़ अन्ना मारी शिमल

 

2011

Islami Baseeraton Ke Asari Tarjuman Prof.Musheer-ul-Haq

 

2004

ख़ामा-ए-ख़ुसरू

 

2003

मैं रोना चाहता हूँ

 

2003

Muallim-e-Tahzeeb: Khwaja Ghulamus Sayyadain

 

2004

Shairi Nahin Hai Ye

 

2011

 

चित्र शायरी 15

एक बोसे के भी नसीब न हों होंठ इतने भी अब ग़रीब न हों

ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन इक उदासी भी साथ लाती है ज़ख़्म उभरते हैं जाने कब कब के जाने किस किस की याद आती है

राह की कुछ तो रुकावट यार कम कर दीजिए आप अपने घर की इक दीवार कम कर दीजिए आप का आशिक़ बहुत कमज़ोर दिल का है हुज़ूर देखिए ये शिद्दत-ए-इन्कार कम कर दीजिए मैं भी होंटों से कहूँगा कम करें जलने का शौक़ आप अगर सरगर्मी-ए-रुख़्सार कम कर दीजिए एक तो शर्म आप की और उस पे तकिया दरमियाँ दोनों दीवारों में इक दीवार कम कर दीजिए आप तो बस खोलिए लब बोसा देने के लिए बोसा देने पर जो है तकरार कम कर दीजिए रात के पहलू में फैला दीजिए ज़ुल्फ़-ए-दराज़ यूँही कुछ तूल-ए-शब-ए-बीमार कम कर दीजिए या इधर कुछ तेज़ कर दीजे घरों की रौशनी या उधर कुछ रौनक़-ए-बाज़ार कम कर दीजिए वो जो पीछे रह गए हैं तेज़-रफ़्तारी करें आप आगे हैं तो कुछ रफ़्तार कम कर दीजिए हाथ में है आप के तलवार कीजे क़त्ल-ए-आम हाँ मगर तलवार की कुछ धार कम कर दीजिए बस मोहब्बत बस मोहब्बत बस मोहब्बत जान-ए-मन बाक़ी सब जज़्बात का इज़हार कम कर दीजिए शाइ'री तन्हाई की रौनक़ है महफ़िल की नहीं 'फ़रहत-एहसास' अपना ये दरबार कम कर दीजिए

इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के

हुई इक ख़्वाब से शादी मिरी तन्हाई की पहली बेटी है उदासी मिरी तन्हाई की अभी मा'लूम नहीं कितने हैं ज़ाती अस्बाब कितनी वजहें हैं समाजी मिरी तन्हाई की जा के देखा तो खुला रौनक़-ए-बाज़ार का राज़ एक इक चीज़ बनी थी मिरी तन्हाई की शहर-दर-शहर जो ये अंजुमनें हैं आबाद तर्बियत-गाहें हैं सारी मिरी तन्हाई की सिर्फ़ आईना-ए-आग़ोश-ए-मोहब्बत में मिली एक तन्हाई जवाबी मिरी तन्हाई की साफ़ है चेहरा-ए-क़ातिल मिरी आँखों में मगर मो'तबर कब है गवाही मिरी तन्हाई की हासिल-ए-वस्ल सिफ़र हिज्र का हासिल भी सिफ़र जाने कैसी है रियाज़ी मिरी तन्हाई की किसी हालत में भी तन्हा नहीं होने देती है यही एक ख़राबी मिरी तन्हाई की मैं जो यूँ फिरता हूँ मय-ख़ानों में बुतख़ानों में है यही रोज़ा नमाज़ी मिरी तन्हाई की 'फ़रहत-एहसास' वो हम-ज़ाद है मेरा जिस ने शहर में धूम मचा दी मिरी तन्हाई की

किसी कली किसी गुल में किसी चमन में नहीं वो रंग है ही नहीं जो तिरे बदन में नहीं

अंदर के हादसों पे किसी की नज़र नहीं हम मर चुके हैं और हमें इस की ख़बर नहीं

कभी इस रौशनी की क़ैद से बाहर भी निकलो तुम हुजूम-ए-हुस्न ने सारा सरापा घेर रक्खा है

वीडियो 18

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Aksar to Qaid Khana e Hasti mein Mar Gaye by Farhat Ehsas

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At Mushaira at Lal Qila Dehli

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Farhat Ehsaas, an eminent Urdu poet from Delhi. Watch him performing at his best at Rekhta studio. फ़रहत एहसास

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Farhat Ehsaas, an eminent Urdu poet from Delhi. Watch him performing at his best at Rekhta studio. फ़रहत एहसास

फ़रहत एहसास_

Farhat Ehsaas, an eminent Urdu poet from Delhi. Watch him performing at "Shaam-e-Sukhan", a ghazal evening organized by Rekhta. फ़रहत एहसास

फ़रहत एहसास

इस तरह आता हूँ बाज़ारों के बीच

फ़रहत एहसास

उम्र बे-वज्ह गुज़ारे भी नहीं जा सकते

फ़रहत एहसास

तुम्हें उस से मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते

फ़रहत एहसास

पैकर-ए-अक़्ल तिरे होश ठिकाने लग जाएँ

फ़रहत एहसास

पूरी तरह से अब के तय्यार हो के निकले

फ़रहत एहसास

ब-ज़ाहिर तो बदन-भर का इलाक़ा घेर रक्खा है

फ़रहत एहसास

रात हुई

तुम को पा लेने की धुन में फ़रहत एहसास

ऑडियो 10

अब दिल की तरफ़ दर्द की यलग़ार बहुत है

उस तरफ़ तू तिरी यकताई है

कभी हँसते नहीं कभी रोते नहीं कभी कोई गुनाह नहीं करते

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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