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फ़रहत एहसास

1952 | दिल्ली, भारत

महत्वपूर्ण उत्तर-आधुनिक शायरों में विख्यात।

महत्वपूर्ण उत्तर-आधुनिक शायरों में विख्यात।

जो इश्क़ चाहता है वो होना नहीं है आज

अब दिल की तरफ़ दर्द की यलग़ार बहुत है

चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है

अंदर के हादसों पे किसी की नज़र नहीं

वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा

एक बोसे के भी नसीब न हों

ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन

राह की कुछ तो रुकावट यार कम कर दीजिए

एक रात वो गया था जहाँ बात रोक के

हुई इक ख़्वाब से शादी मिरी तन्हाई की

किसी कली किसी गुल में किसी चमन में नहीं

अंदर के हादसों पे किसी की नज़र नहीं

कभी इस रौशनी की क़ैद से बाहर भी निकलो तुम

एक रात वो गया था जहाँ बात रोक के

इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से

इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से

एक रात वो गया था जहाँ बात रोक के