तुम्हें उस से मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते

फ़रहत एहसास

तुम्हें उस से मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते

फ़रहत एहसास

MORE BY फ़रहत एहसास

    तुम्हें उस से मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते

    किसी दिन उस के दर पे रक़्स-ए-वहशत क्यूँ नहीं करते

    इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से

    मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँ नहीं करते

    तुम्हारे दिल पे अपना नाम लिक्खा हम ने देखा है

    हमारी चीज़ फिर हम को इनायत क्यूँ नहीं करते

    मिरी दिल की तबाही की शिकायत पर कहा उस ने

    तुम अपने घर की चीज़ों की हिफ़ाज़त क्यूँ नहीं करते

    बदन बैठा है कब से कासा-ए-उम्मीद की सूरत

    सो दे कर वस्ल की ख़ैरात रुख़्सत क्यूँ नहीं करते

    क़यामत देखने के शौक़ में हम मर मिटे तुम पर

    क़यामत करने वालो अब क़यामत क्यूँ नहीं करते

    मैं अपने साथ जज़्बों की जमाअत ले के आया हूँ

    जब इतने मुक़तदी हैं तो इमामत क्यूँ नहीं करते

    तुम अपने होंठ आईने में देखो और फिर सोचो

    कि हम सिर्फ़ एक बोसे पर क़नाअ'त क्यूँ नहीं करते

    बहुत नाराज़ है वो और उसे हम से शिकायत है

    कि इस नाराज़गी की भी शिकायत क्यूँ नहीं करते

    कभी अल्लाह-मियाँ पूछेंगे तब उन को बताएँगे

    किसी को क्यूँ बताएँ हम इबादत क्यूँ नहीं करते

    मुरत्तब कर लिया है कुल्लियात-ए-ज़ख़्म अगर अपना

    तो फिर 'एहसास-जी' इस की इशाअ'त क्यूँ नहीं करते

    वीडियो
    This video is playing from YouTube

    Videos
    This video is playing from YouTube

    फ़रहत एहसास

    फ़रहत एहसास

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi volutpat porttitor tortor, varius dignissim.

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY