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उबैद सिद्दीक़ी

1957 - | दिल्ली, भारत

बीबीसी, उर्दू सर्विस से संबंधित रहे, एमसीआरसी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के डायरेक्टर।

बीबीसी, उर्दू सर्विस से संबंधित रहे, एमसीआरसी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के डायरेक्टर।

ग़ज़ल 34

शेर 4

मैं बस ये कह रहा हूँ रस्म-ए-वफ़ा जहाँ में

बिल्कुल नहीं मिटी है कमयाब हो गई है

गर्मी सी ये गर्मी है

माँग रहे हैं लोग पनाह

मैं पहले बे-बाक हुआ था जोश-ए-मोहब्बत में

मेरी तरह फिर उस ने भी शरमाना छोड़ा था

ई-पुस्तक 1

Rang Hawa Mein Phail Raha Hai

 

2010

 

वीडियो 19

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Kaise badal rahe ho batata nahi hai kiya

Prof. Obaid Siddiqui is a well known media personality. He is currently Officiating director of AJK Mass Communication Research Centre Jamia Millia Islamia New Delhi. Obaid is a well known modern Urdu poet whose writing inspire many and kindle a ray of hope. He can be seen reciting his poetry at Rekhta studio उबैद सिद्दीक़ी

Koi kuch batayega kya ho gaya

Prof. Obaid Siddiqui is a well known media personality. He is currently Officiating director of AJK Mass Communication Research Centre Jamia Millia Islamia New Delhi. Obaid is a well known modern Urdu poet whose writing inspire many and kindle a ray of hope. He can be seen reciting his poetry at Rekhta studio उबैद सिद्दीक़ी

Nuqsan kya batayein hamara kiya bahot

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Pehle ek Mauj-e-hawa aati hai

Prof. Obaid Siddiqui is a well known media personality. He is currently Officiating director of AJK Mass Communication Research Centre Jamia Millia Islamia New Delhi. Obaid is a well known modern Urdu poet whose writing inspire many and kindle a ray of hope. He can be seen reciting his poetry at Rekhta studio उबैद सिद्दीक़ी

अगर इस शहर की आब ओ हवा तब्दील हो जाए

उबैद सिद्दीक़ी

उस के परतव से हुआ है ज़ाफ़रानी रंग का

उबैद सिद्दीक़ी

कब तक उस का हिज्र मनाता सहरा छोड़ दिया

उबैद सिद्दीक़ी

कभी कभी ये सूना-पन खल जाता है

उबैद सिद्दीक़ी

क्या सुने कोई ज़बानी मेरी

उबैद सिद्दीक़ी

कार-ए-दुनिया के तक़ाज़ों को निभाने में कटी

उबैद सिद्दीक़ी

कोई कुछ बताएगा क्या हो गया

उबैद सिद्दीक़ी

ख़ुश्क दरियाओं को पानी दे ख़ुदा

उबैद सिद्दीक़ी

नुक़सान क्या बताएँ हमारा किया बहुत

उबैद सिद्दीक़ी

पहले इक मौज-ए-हवा आती है

उबैद सिद्दीक़ी

बैठे बिठाए आज फिर किस का ख़याल आ गया

उबैद सिद्दीक़ी

मैं फ़र्द-ए-जुर्म तेरी तय्यार कर रहा हूँ

उबैद सिद्दीक़ी

मंज़र रोज़ बदल देता हूँ अपनी नर्म-ख़याली से

उबैद सिद्दीक़ी

हमें कुछ और जीना है तो दिल को शाद रक्खेंगे

उबैद सिद्दीक़ी

ऑडियो 15

अगर इस शहर की आब ओ हवा तब्दील हो जाए

उस के परतव से हुआ है ज़ाफ़रानी रंग का

कब तक उस का हिज्र मनाता सहरा छोड़ दिया

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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