Sarvat Husain's Photo'

सरवत हुसैन

1949 - 1996 | कराची, पाकिस्तान

ग़ज़ल 38

नज़्म 24

शेर 34

बहुत मुसिर थे ख़ुदायान-ए-साबित-ओ-सय्यार

सो मैं ने आइना आसमाँ पसंद किए

ये इंतिहा-ए-मसर्रत का शहर है 'सरवत'

यहाँ तो हर दर-ओ-दीवार इक समुंदर है

ये कौन उतरा पए-गश्त अपनी मसनद से

और इंतिज़ाम-ए-मकान सिरा बदलने लगा

ऑडियो 12

इक रोज़ मैं भी बाग़-ए-अदन को निकल गया

क़सम इस आग और पानी की

क़िन्दील-ए-मह-ओ-मेहर का अफ़्लाक पे होना

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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