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मोहम्मद ख़ालिद

1950 | लाहौर, पाकिस्तान

ग़ज़ल 10

शेर 2

कौन सुनता है हवाओं की अजब सरगोशियाँ

और जाती हैं हवाएँ दर-ब-दर किस के लिए

अव्वल-ए-इश्क़ की साअत जा कर फिर नहीं आई

फिर कोई मौसम पहले मौसम सा नहीं देखा

 

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