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सरवत हुसैन

1949 - 1996 | कराची, पाकिस्तान

ग़ज़ल

इक रोज़ मैं भी बाग़-ए-अदन को निकल गया

नोमान शौक़

क़सम इस आग और पानी की

नोमान शौक़

क़िन्दील-ए-मह-ओ-मेहर का अफ़्लाक पे होना

नोमान शौक़

घर से निकला तो मुलाक़ात हुई पानी से

नोमान शौक़

जंगल में कभी जो घर बनाऊँ

नोमान शौक़

जाने उस ने क्या देखा शहर के मनारे में

नोमान शौक़

दश्त ले जाए कि घर ले जाए

नोमान शौक़

पूरे चाँद की सज धज है शहज़ादों वाली

नोमान शौक़

फिर वो बरसात ध्यान में आई

नोमान शौक़

मैं जो गुज़रा सलाम करने लगा

नोमान शौक़

रात ढलने के ब'अद क्या होगा

नोमान शौक़

लहर-लहर आवारगियों के साथ रहा

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI