Irfan Siddiqi's Photo'

इरफ़ान सिद्दीक़ी

1939 - 2004 | लखनऊ, भारत

सबसे महत्वपूर्ण आधुनिक शायरों में शामिल, अपने नव-क्लासिकी लहजे के लिए विख्यात।

सबसे महत्वपूर्ण आधुनिक शायरों में शामिल, अपने नव-क्लासिकी लहजे के लिए विख्यात।

ग़ज़ल 74

शेर 80

उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए

कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए

बदन में जैसे लहू ताज़ियाना हो गया है

उसे गले से लगाए ज़माना हो गया है

रात को जीत तो पाता नहीं लेकिन ये चराग़

कम से कम रात का नुक़सान बहुत करता है

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ई-पुस्तक 13

Canvas

 

1978

Dariya

 

1999

इरफ़ान सिद्दीक़ी: शख़्स और शायर

 

2012

Irfan Siddiqui: Hayaat, Khidmaat Aur Sheri Kainaat

 

2015

Ishq Nama

 

1997

Mauj-e-Darya

 

2005

Muhawara-e-Jan

 

 

राबता-ए-अाम्मा

 

1977

Rut-e-Singhar

 

1981

Saat Samawat

 

1992

वीडियो 3

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए

इरफ़ान सिद्दीक़ी

कोई बिजली इन ख़राबों में घटा रौशन करे

इरफ़ान सिद्दीक़ी

जब ये आलम हो तो लिखिए लब-ओ-रुख़्सार पे ख़ाक

इरफ़ान सिद्दीक़ी

ऑडियो 24

उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए

उन्हीं की शह से उन्हें मात करता रहता हूँ

कुछ हर्फ़ ओ सुख़न पहले तो अख़बार में आया

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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