Khwaja Razi Haidar's Photo'

ख़्वाज़ा रज़ी हैदर

1946 | कराची, पाकिस्तान

समकालीन पाकिस्तानी शायर

समकालीन पाकिस्तानी शायर

ग़ज़ल 15

शेर 5

नहीं एहसास तुम को राएगानी का हमारी

सुहुलत से तुम्हें शायद मयस्सर हो गए हैं

गुज़री जो रहगुज़र में उसे दरगुज़र किया

और फिर ये तज़्किरा कभी जा कर घर किया

मैं ने पूछा कि कोई दिल-ज़दगाँ की है मिसाल

किस तवक़्क़ुफ़ से कहा उस ने कि हाँ तुम और मैं

पुस्तकें 2

Be Dayar Sham

 

1995

मुफ़्ती मोहम्मद रज़ा अंसारी

शख़्सियत और ख़िदमात

1992

 

वीडियो 4

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
ऐसा कर सकते थे क्या कोई गुमाँ तुम और मैं

ख़्वाज़ा रज़ी हैदर

चराग़-ए-बज़्म तिरी मंसबी है कितनी देर

ख़्वाज़ा रज़ी हैदर

वक़्त अजीब आ गया मंसब-ओ-जाह के लिए

ख़्वाज़ा रज़ी हैदर

सर-निगूँ दिल की तरह दस्त-ए-दुआ हो भी चुके

ख़्वाज़ा रज़ी हैदर

संबंधित शायर

  • अजमल सिराज अजमल सिराज समकालीन

"कराची" के और शायर

  • ज़ीशान साहिल ज़ीशान साहिल
  • आरज़ू लखनवी आरज़ू लखनवी
  • सज्जाद बाक़र रिज़वी सज्जाद बाक़र रिज़वी
  • अनवर शऊर अनवर शऊर
  • सलीम कौसर सलीम कौसर
  • उबैदुल्लाह अलीम उबैदुल्लाह अलीम
  • अज़रा अब्बास अज़रा अब्बास
  • जमाल एहसानी जमाल एहसानी
  • ज़ेहरा निगाह ज़ेहरा निगाह
  • मुस्तफ़ा ज़ैदी मुस्तफ़ा ज़ैदी