Ahmad Faraz's Photo'

अहमद फ़राज़

1931 - 2008 | इस्लामाबाद, पाकिस्तान

बेइंतिहा लोकप्रिय शायर/अपनी रूमानी और विरोधी -कविता के लिए प्रसिद्ध

बेइंतिहा लोकप्रिय शायर/अपनी रूमानी और विरोधी -कविता के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 134

नज़्म 34

शेर 165

दिल को तिरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है

और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

should we now be parted, in dreams we might be found

like dried flowers found in books, fragile, fraying browned

should we now be parted, in dreams we might be found

like dried flowers found in books, fragile, fraying browned

आँख से दूर हो दिल से उतर जाएगा

वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा

ई-पुस्तक 33

Ahamad Faraz Shakhsiyat Aur Shayari

 

2015

बे आवाज़ गली कूचों में

 

1982

Be Awaz Gali Kuchon Mein

 

2002

Be Awaz Kuchon Mein

 

1984

दर्द-ए-आशोब

 

 

Dard-e-Aashob

 

2002

दर्द-ए-आशोब

 

 

दर्द-ए-आशूब

 

1966

Dard-e-Ashob

 

 

Ghazal Baha Na Karun

 

2002

चित्र शायरी 52

वीडियो 131

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Ahmad Faraz in a Mushaira

अहमद फ़राज़

Ahmad Faraz reciting his poetry in OSLO, 2006.

अहमद फ़राज़

Ahmed Faraz - Zindagi youn thi kay jeenay ka bahana tu tha - UrduWorld.Com

अहमद फ़राज़

At a mushaira

अहमद फ़राज़

Lucknow Sanskrutic Mahotsav Mushaira

अहमद फ़राज़

Main ek do roz ka mehmaan tere shahr mein

अहमद फ़राज़

Mujhe Tere Dard ke Alava Bhi- Very Nice Nazm Written & Recited By Ahmed Faraz

अहमद फ़राज़

Mushaira Jashn e Faiz 1986

अहमद फ़राज़

Reciting own poetry

अहमद फ़राज़

अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रक्खा है

अहमद फ़राज़

अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ

अहमद फ़राज़

इक बूँद थी लहू की सर-ए-दार तो गिरी

अहमद फ़राज़

इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ

अहमद फ़राज़

उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया

अहमद फ़राज़

ऐ मेरे सारे लोगो

अब मिरे दूसरे बाज़ू पे वो शमशीर है जो अहमद फ़राज़

क़ुर्ब-ए-जानाँ का न मय-ख़ाने का मौसम आया

अहमद फ़राज़

काली दीवार

कल वॉशिंगटन शहर की हम ने सैर बहुत की यार अहमद फ़राज़

ख़ामोश हो क्यूँ दाद-ए-जफ़ा क्यूँ नहीं देते

अहमद फ़राज़

चाक-पैराहनी-ए-गुल को सबा जानती है

अहमद फ़राज़

जान से इश्क़ और जहाँ से गुरेज़

अहमद फ़राज़

तुझ से बिछड़ के हम भी मुक़द्दर के हो गए

अहमद फ़राज़

तुझे है मश्क़-ए-सितम का मलाल वैसे ही

अहमद फ़राज़

मैं तो मक़्तल में भी क़िस्मत का सिकंदर निकला

अहमद फ़राज़

मुंतज़िर कब से तहय्युर है तिरी तक़रीर का

अहमद फ़राज़

मुहासरा

मिरे ग़नीम ने मुझ को पयाम भेजा है अहमद फ़राज़

मिसाल-ए-दस्त-ए-ज़ुलेख़ा तपाक चाहता है

अहमद फ़राज़

ये क्या कि सब से बयाँ दिल की हालतें करनी

अहमद फ़राज़

ये मेरी ग़ज़लें ये मेरी नज़्में

ये मेरी ग़ज़लें ये मेरी नज़्में अहमद फ़राज़

वापसी

उस ने कहा अहमद फ़राज़

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

अहमद फ़राज़

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

अहमद फ़राज़

सामने उस के कभी उस की सताइश नहीं की

अहमद फ़राज़

हम तो यूँ ख़ुश थे कि इक तार गरेबान में है

अहमद फ़राज़

हर कोई दिल की हथेली पे है सहरा रक्खे

अहमद फ़राज़

ऑडियो 104

अजब जुनून-ए-मसाफ़त में घर से निकला था

अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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