Kishwar Naheed's Photo'

किश्वर नाहीद

1940 | इस्लामाबाद, पाकिस्तान

पाकिस्तानी शायरा , अपने स्त्री-वादी विचारों और धार्मिक कट्टरपन के विरोध के लिए मशहूर

पाकिस्तानी शायरा , अपने स्त्री-वादी विचारों और धार्मिक कट्टरपन के विरोध के लिए मशहूर

ग़ज़ल 56

नज़्म 23

शेर 10

जवान गेहूँ के खेतों को देख कर रो दें

वो लड़कियाँ कि जिन्हें भूल बैठीं माएँ भी

हमें देखो हमारे पास बैठो हम से कुछ सीखो

हमीं ने प्यार माँगा था हमीं ने दाग़ पाए हैं

अपनी बे-चेहरगी छुपाने को

आईने को इधर उधर रक्खा

दोहा 7

आँख की पुतली सब कुछ देखे देखे अपनी ज़ात

उजला धागा मैला होवे लगें जो मैले हात

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मैं बहरी थी कागा बोला सुन सकी संदेश

दिल कहता है कल आएँगे पिया बदल के भेस

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तकिया भीगा साँस भी डूबी मुरझाई हर आस

दिल को राह पे लाने की हर आस बनी संयास

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बच्चों की कहानी 6

ई-पुस्तक 21

Aabad Kharaba

 

2016

Aurat Ek Nafsiyati Mutala

 

1982

Baqi Manda Khwab

 

1982

चाँद की बेटी

 

2012

दश्त-ए-कैस में लैला

कुल्लियात

2001

Gadhe Ne Bajai Bansuri

 

1988

Gadhe Ne Bajai Bansuri

 

1991

Galiyan Dhoop Darwaze

 

1978

जादू की हंडिया

 

2012

ख़्वातीन अफ़्साना निगार

 

1996

वीडियो 26

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
"Tum Swami Raam Bane Mere"

Noted feminist Urdu poet Kishwar Nahid who is commonly known for her bold and radical views for highlighting the issues of women and their plight in the present male dominant society through her poetry, is at Rekhta studio. किश्वर नाहीद

"Wo Jo Bachchiyon Se Bhi Dar Gaye"

Noted feminist Urdu poet Kishwar Nahid who is commonly known for her bold and radical views for highlighting the issues of women and their plight in the present male dominant society through her poetry, is at Rekhta studio. किश्वर नाहीद

Kishwar Naheed at Mushaira

किश्वर नाहीद

Kishwar Nahid - Woh Ajnabi Tha Ghair Tha Kisne Kaha Na Tha

Noted feminist Urdu poet Kishwar Nahid who is commonly known for her bold and radical views for highlighting the issues of women and their plight in the present male dominant society through her poetry, is at Rekhta studio. किश्वर नाहीद

assi buriya'n ve loko

किश्वर नाहीद

उम्र में उस से बड़ी थी लेकिन पहले टूट के बिखरी मैं

किश्वर नाहीद

एक ही आवाज़ पर वापस पलट आएँगे लोग

किश्वर नाहीद

ऐ रह-ए-हिज्र-ए-नौ-फ़रोज़ देख कि हम ठहर गए

किश्वर नाहीद

कुछ अगर है तो मिले

ख़्वाब में आए मुझे मुझ से मिलाए किश्वर नाहीद

ख़ुदाओं से कह दो

जिस दिन मुझे मौत आए किश्वर नाहीद

गिलास लैंडस्केप

अभी सर्दी पोरों की पहचान के मौसम में है किश्वर नाहीद

घास तो मुझ जैसी है

घास भी मुझ जैसी है किश्वर नाहीद

ज़ेहन रहता है बदन ख़्वाब के दम तक उस का

किश्वर नाहीद

तुझ से वादा अज़ीज़-तर रक्खा

किश्वर नाहीद

तिरे क़रीब पहुँचने के ढंग आते थे

किश्वर नाहीद

दिल को भी ग़म का सलीक़ा न था पहले पहले

किश्वर नाहीद

बिगड़ी बात बनाना मुश्किल बड़ी बात बनाए कौन

किश्वर नाहीद

मुझे भुला के मुझे याद भी रखा तू ने

किश्वर नाहीद

मिरी आँखों में दरिया झूलता है

किश्वर नाहीद

विदा करता है दिल सतवत-ए-रग-ए-जाँ को

किश्वर नाहीद

वो अजनबी था ग़ैर था किस ने कहा न था

किश्वर नाहीद

सोने से पहले एक ख़याल

मुझे नवम्बर की धूप की तरह मत चाहो किश्वर नाहीद

हम गुनहगार औरतें

ये हम गुनहगार औरतें हैं किश्वर नाहीद

हवा कुछ अपने सवाल तहरीर देखती है

किश्वर नाहीद

ऑडियो 25

उम्र में उस से बड़ी थी लेकिन पहले टूट के बिखरी मैं

एक ही आवाज़ पर वापस पलट आएँगे लोग

ख़ुश्बू को रंगतों पे उभरता हुआ भी देख

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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