लड़ाई का नतीजा

किश्वर नाहीद

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    दो लड़कियाँ समुंद्र के किनारे टहल रही थीं। एक लड़की चिल्लाई, “वो देखो सामने सीपी पड़ी है।” ये सुनकर दूसरी लड़की आगे बढ़ी और उसने सीपी उठा ली।

    पहली लड़की बोली, “तुम ये सीपी नहीं ले सकतीं। ये मैंने पहले देखी थी, इसलिए इस पर मेरा हक़ है।”

    “लेकिन उठाई तो मैंने है, इसलिए ये सीपी मेरी है।” दूसरी लड़की ने कहा...

    दोनों लड़ने लगीं। एक ने थप्पड़ मारा। दूसरी ने लात टिकाई। अभी वो लड़ ही रही थीं कि उधर से एक आदमी गुज़रा। कहने लगा, “क्या बात है? क्यों लड़ती हो?”

    “देखिए, आप ही इन्साफ़ कीजिए। ये सीपी मैंने देखी थी। इसलिए ये मेरी है।” पहली लड़की बोली...

    “लेकिन उठाई तो मैंने थी।” दूसरी जल्दी से बोली।

    उस आदमी ने कहा, “मुझे सीपी दिखाओ मैं अभी फ़ैसला किए देता हूँ।”

    लड़की ने सीपी उसको दे दी। उसने सीपी के दो टुकड़े किए तो उसके अंदर से मोती निकला। उसने मोती अपनी जेब में रख लिया और बोला, “देखो भई, एक लड़की ने सीपी को देखा, दूसरी ने उठा लिया। इसलिए इस पर दोनों का हक़ है। लो, एक टुकड़ा तुम ले लो और एक तुम।”

    ये कह कर वो आदमी हँसता हुआ चला गया। लड़कियाँ हाथ मलती रह गईं।

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