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पाकिस्तानी शायरा , अपने स्त्री-वादी विचारों और धार्मिक कट्टरपन के विरोध के लिए मशहूर

पाकिस्तानी शायरा , अपने स्त्री-वादी विचारों और धार्मिक कट्टरपन के विरोध के लिए मशहूर

ग़ज़ल

उम्र में उस से बड़ी थी लेकिन पहले टूट के बिखरी मैं

किश्वर नाहीद

एक ही आवाज़ पर वापस पलट आएँगे लोग

किश्वर नाहीद

ख़ुश्बू को रंगतों पे उभरता हुआ भी देख

अज़रा नक़वी

ज़ेहन रहता है बदन ख़्वाब के दम तक उस का

किश्वर नाहीद

तुझ से वादा अज़ीज़-तर रक्खा

किश्वर नाहीद

तिरे क़रीब पहुँचने के ढंग आते थे

किश्वर नाहीद

बिगड़ी बात बनाना मुश्किल बड़ी बात बनाए कौन

किश्वर नाहीद

मुझे भुला के मुझे याद भी रखा तू ने

किश्वर नाहीद

हवा कुछ अपने सवाल तहरीर देखती है

किश्वर नाहीद

ऐ रह-ए-हिज्र-ए-नौ-फ़रोज़ देख कि हम ठहर गए

किश्वर नाहीद

कुछ दिन तो मलाल उस का हक़ था

किश्वर नाहीद

तलाश दरिया की थी ब-ज़ाहिर सराब देखा

किश्वर नाहीद

दिल को भी ग़म का सलीक़ा न था पहले पहले

किश्वर नाहीद

मिरी आँखों में दरिया झूलता है

किश्वर नाहीद

ये हौसला तुझे महताब-ए-जाँ हुआ कैसे

किश्वर नाहीद

विदा करता है दिल सतवत-ए-रग-ए-जाँ को

किश्वर नाहीद

सुलगती रेत पे आँखें भी ज़ेर-ए-पा रखना

किश्वर नाहीद

नज़्म

ख़ुदाओं से कह दो

किश्वर नाहीद

गिलास लैंडस्केप

किश्वर नाहीद

घास तो मुझ जैसी है

किश्वर नाहीद

घास तो मुझ जैसी है

अज़रा नक़वी

शिकस्त-ए-रंग

अज़रा नक़वी

सोने से पहले एक ख़याल

किश्वर नाहीद

सोने से पहले एक ख़याल

अज़रा नक़वी

हम गुनहगार औरतें

किश्वर नाहीद

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI