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फ़हमीदा रियाज़

1946 - 2018 | कराची, पाकिस्तान

पाकिस्तानी शायरा। अपने स्त्री-वादी और संस्था-विरोधी विचारों के लिए प्रसिद्ध

पाकिस्तानी शायरा। अपने स्त्री-वादी और संस्था-विरोधी विचारों के लिए प्रसिद्ध

पुस्तकें 21

आदमी की ज़िन्दगी

 

1999

Adhura Aadmi

 

1986

Badan Dareeda

 

1978

Ek Tha Azdaha

 

1998

Khat-e-Marmooz

 

2002

Khatir-e-Ahbab

 

1998

Meri Nazmein

 

1981

Patthar Ki Zaban

 

1982

Sab Laal-o-Guhar

Kulliyat

2011

Sayana Kaun

 

1998

चित्र शायरी 1

ज़बानों के रस में ये कैसी महक है ये बोसा कि जिस से मोहब्बत की सहबा की उड़ती है ख़ुश्बू ये बद-मस्त ख़ुश्बू जो गहरा ग़ुनूदा नशा ला रही है ये कैसा नशा है मेरे ज़ेहन के रेज़े रेज़े में एक आँख सी खुल गई है तुम अपनी ज़बाँ मेरे मुँह में रखे जैसे पाताल से मेरी जाँ खींचते हो ये भीगा हुआ गर्म ओ तारीक बोसा अमावस की काली बरसती हुई रात जैसे उमड़ती चली आ रही है कहीं कोई साअत अज़ल से रमीदा मिरी रूह के दश्त में उड़ रही थी वो साअत क़रीं-तर चली आ रही है मुझे ऐसा लगता है तारीकियों के लरज़ते हुए पुल को मैं पार करती चली जा रही हूँ ये पुल ख़त्म होने को है और अब उस के आगे कहीं रौशनी है

 

वीडियो 3

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ऑडियो 21

कभी धनक सी उतरती थी उन निगाहों में

इश्क़ आवारा-मिज़ाज

एक औरत की हँसी

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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