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पीरज़ादा क़ासीम

1943 | कराची, पाकिस्तान

समाजिक और राजनैतिक व्यंग पर अधारित शायरी के लिए विख्यात पाकिस्तानी शायर

समाजिक और राजनैतिक व्यंग पर अधारित शायरी के लिए विख्यात पाकिस्तानी शायर

ग़ज़ल 51

नज़्म 4

 

शेर 4

शहर तलब करे अगर तुम से इलाज-ए-तीरगी

साहिब-ए-इख़्तियार हो आग लगा दिया करो

तुम्हें जफ़ा से यूँ बाज़ आना चाहिए था

अभी कुछ और मिरा दिल दुखाना चाहिए था

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इक सज़ा और असीरों को सुना दी जाए

यानी अब जुर्म-ए-असीरी की सज़ा दी जाए

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पुस्तकें 4

Tund Hawa Ke Jashn Mein

 

1990

चहार-सू

पीरज़ादा क़ासिम रज़ा सिद्दीक़ी नंबर: खण्ड-023

2014

 

वीडियो 11

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

पीरज़ादा क़ासीम

पीरज़ादा क़ासीम

कार-ए-ख़ुलूस-ए-यार का मुझ को यक़ीन आ गया

पीरज़ादा क़ासीम

ग़म से बहल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं

पीरज़ादा क़ासीम

ग़म से बहल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं

पीरज़ादा क़ासीम

चराग़ हूँ कब से जल रहा हूँ मुझे दुआओं में याद रखिए

पीरज़ादा क़ासीम

चाँद भी बुझा डाला दिल दुखाने वालों ने

पीरज़ादा क़ासीम

ज़ख़्म दबे तो फिर नया तीर चला दिया करो

पीरज़ादा क़ासीम

नज़र में नित-नई हैरानियाँ लिए फिरिए

पीरज़ादा क़ासीम

बे-दिली से हँसने को ख़ुश-दिली न समझा जाए

पीरज़ादा क़ासीम

ये हादिसा मुझे हैरान कर गया सर-ए-शाम

पीरज़ादा क़ासीम

ऑडियो 15

अदाकारी में भी सौ कर्ब के पहलू निकल आए

अब हर्फ़-ए-तमन्ना को समाअत न मिलेगी

कौन गुमाँ यक़ीं बना कौन सा घाव भर गया

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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