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पीरज़ादा क़ासीम

1943 | कराची, पाकिस्तान

समाजिक और राजनैतिक व्यंग पर अधारित शायरी के लिए विख्यात पाकिस्तानी शायर

समाजिक और राजनैतिक व्यंग पर अधारित शायरी के लिए विख्यात पाकिस्तानी शायर

ग़ज़ल 51

शेर 4

शहर तलब करे अगर तुम से इलाज-ए-तीरगी

साहिब-ए-इख़्तियार हो आग लगा दिया करो

तुम्हें जफ़ा से यूँ बाज़ आना चाहिए था

अभी कुछ और मिरा दिल दुखाना चाहिए था

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उस की ख़्वाहिश है कि अब लोग रोएँ हँसें

बे-हिसी वक़्त की आवाज़ बना दी जाए

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इक सज़ा और असीरों को सुना दी जाए

यानी अब जुर्म-ए-असीरी की सज़ा दी जाए

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पुस्तकें 4

Jinhain Raste Mein Khabar Hui

 

2017

Tund Hawa Ke Jashn Mein

 

1990

चहार-सू

Shumara Number-000

2014

 

चित्र शायरी 2

कभी हवा तो कभी ख़ाक-ए-रहगुज़र होना मिरे नसीब में लिखा है दर-ब-दर होना अगर चलो तो मिरे साथ ही चलो लेकिन कठिन सफ़र से ज़ियादा है हम-सफ़र होना उदास उदास ये दीवार-ओ-दर बताते हैं कि जैसे रास न हो उन को मेरा घर होना क़दम उठे भी नहीं और सफ़र तमाम हुआ ग़ज़ब है राह का इतना भी मुख़्तसर होना ये दौर-ए-कम-नज़राँ है तो फिर हुनर का ज़ियाँ जो एक बार न होना तो बेशतर होना

उस की ख़्वाहिश है कि अब लोग न रोएँ न हँसें बे-हिसी वक़्त की आवाज़ बना दी जाए

 

वीडियो 16

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

पीरज़ादा क़ासीम

पीरज़ादा क़ासीम

अब हर्फ़-ए-तमन्ना को समाअत न मिलेगी

पीरज़ादा क़ासीम

एक से सिलसिले हैं सब हिज्र की रुत बता गई

पीरज़ादा क़ासीम

कुदूरतों के दरमियाँ अदावतों के दरमियाँ

पीरज़ादा क़ासीम

कार-ए-ख़ुलूस-ए-यार का मुझ को यक़ीन आ गया

पीरज़ादा क़ासीम

कार-ए-ख़ुलूस-ए-यार का मुझ को यक़ीन आ गया

पीरज़ादा क़ासीम

ग़म से बहल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं

पीरज़ादा क़ासीम

ग़म से बहल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं

पीरज़ादा क़ासीम

चराग़ हूँ कब से जल रहा हूँ मुझे दुआओं में याद रखिए

पीरज़ादा क़ासीम

चाँद भी बुझा डाला दिल दुखाने वालों ने

पीरज़ादा क़ासीम

ज़ख़्म दबे तो फिर नया तीर चला दिया करो

पीरज़ादा क़ासीम

नज़र में नित-नई हैरानियाँ लिए फिरिए

पीरज़ादा क़ासीम

बे-दिली से हँसने को ख़ुश-दिली न समझा जाए

पीरज़ादा क़ासीम

ये हादिसा मुझे हैरान कर गया सर-ए-शाम

पीरज़ादा क़ासीम

ऑडियो 15

अदाकारी में भी सौ कर्ब के पहलू निकल आए

अब हर्फ़-ए-तमन्ना को समाअत न मिलेगी

कौन गुमाँ यक़ीं बना कौन सा घाव भर गया

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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